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आस्था वैष्णव की ओर से हरेली पर्व की शुभकामनाएँ: - 8 साल की उम्र में दिया छत्तीसगढ़ी वेशभूषा और संस्कृति पर विशेष जोर

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आसरा  :   छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर मनाए जा रहे लोकपर्व हरेली तिहार के शुभ अवसर पर, मात्र 8 साल की नन्ही आस्था वैष्णव ने सभी प्रदेशवासियों और छत्तीसगढ़ महतारी के सपूतों को अपनी ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ भेजी हैं। अपनी कम उम्र के बावजूद, आस्था ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ी वेशभूषा और स्थानीय संस्कृति के महत्व पर विशेष जोर दिया है। आस्था वैष्णव ने अपने शुभकामना संदेश में कहा, "हरेली का त्योहार हमारी मिट्टी से जुड़ा है, यह किसानों और प्रकृति का सम्मान करने का दिन है। मुझे बहुत खुशी हो रही है कि हम सब मिलकर यह त्योहार मना रहे हैं।" इस वर्ष हरेली का उल्लास राज्य भर में देखा जा रहा है, जहाँ किसान अपनी कृषि औजारों की पूजा कर रहे हैं और अच्छी फसल की कामना कर रहे हैं। गेड़ी चढ़ने का पारंपरिक खेल भी हर जगह बच्चों और बड़ों को आकर्षित कर रहा है। 8 वर्षीय आस्था ने बताया पारंपरिक वेशभूषा का महत्व: इस बार हरेली पर्व के उत्सव में एक खास बात यह रही कि बड़ी संख्या में लोग, विशेषकर बच्चे, पारंपरिक छत्तीसगढ़ी वेशभूषा में सजे दिखाई दिए, और इसी बात पर नन्ही आस्था ने भी खुशी जताई। उन्होंने कहा, "जब ...

कड़ी धूप हो या ठंड प्रतिदिन चैलेंज स्वीकार करती मितानिन सुमन साहू की प्रेरणादायी कहानी

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दीपक वैष्णव…..बधाई हो! आप माँ बनने वाली हैं।यह खुशखबरी पूरे घर के वातावरण को आनंदित और भावविभोर कर देती है।गर्भावस्था के दौरान अंतिम पंक्ति में खड़ी मितानिन ही सच्चा दोस्त साबित होती है।जिन्हें हर पल परवाह होती है गर्भस्थ शिशु और माता की।मितानिन शब्द का शाब्दिक अर्थ ही “दोस्त” होता है।आज हम बात करेंगे राजनांदगाँव जिले की रहने वाली मितानिन (स्वास्थ्य कार्यकर्ता) सुमन साहू के बारे में जिन्होंने मातृ स्वास्थ्य,शिशु स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही है। 1st खबर को सुमन साहू ने बताया कि दिन हो या रात किसी भी समय कोई महिला प्रसव पीड़ा से जूझ रही होती है हम बगैर समय गवाएं उनके पास पहुंच जाते है।माथे पर चिंता की लकीरें होने के साथ शुकुन भी होता है कि आने वाली पीढ़ियों के साक्षी बनने का मौका मिला है।मैं ईश्वर को हमेशा धन्यवाद देती हूं कि उन्होंने मुझे यह सेवा के लिए यह अवसर दिया।आखिर मैं भी इसी समाज की हिस्सा हूं। मैं हमेशा यही सोचती हूँ कि जिंदगी अनुशासन का दूसरा नाम है।इसीलिए अपने एक-एक पल का सदुपयोग करना सीख गई।काम और परिवार को संतुलन बनाकर समाज के लिए सकारात्म...